Author: Yogesh Praveen
Paraya Chand(पराया चाँद)
‘पराया चाँद’ प्रसिद्ध अवधी साहित्यकार, इतिहासकार और लखनऊ के सांस्कृतिक अध्येता योगेश प्रवीण की एक संवेदनशील साहित्यिक कृति है। इस पुस्तक में मानवीय संबंधों, सामाजिक यथार्थ, प्रेम, विरह, स्मृतियों और जीवन की बदलती परिस्थितियों का मार्मिक चित्रण किया गया है। लेखक अपनी विशिष्ट भावपूर्ण भाषा और सांस्कृतिक दृष्टि के माध्यम से पाठकों को मानवीय संवेदनाओं के निकट ले जाते हैं।
पुस्तक का शीर्षक ‘पराया चाँद’ उस आकांक्षा और दूरी का प्रतीक है, जिसे मनुष्य जीवनभर पाना चाहता है, परंतु वह अक्सर उसकी पहुँच से दूर रह जाती है। लेखक विभिन्न पात्रों और घटनाओं के माध्यम से यह दर्शाते हैं कि जीवन में रिश्तों का महत्व केवल साथ रहने में नहीं, बल्कि विश्वास, अपनत्व और भावनात्मक जुड़ाव में निहित है। जब स्वार्थ, अहंकार और परिस्थितियाँ इन संबंधों पर प्रभाव डालती हैं, तो अपने भी पराए प्रतीत होने लगते हैं।
योगेश प्रवीण ने इस कृति में भारतीय समाज, विशेषकर अवध की तहज़ीब, मानवीय मूल्यों और सामाजिक परिवर्तनों को अत्यंत सहजता से प्रस्तुत किया है। उनकी लेखन शैली में लखनऊ की संस्कृति, भाषा की मिठास और जीवन-दर्शन की गहराई स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। वे यह संदेश देते हैं कि जीवन में प्रेम, करुणा, संवेदनशीलता और मानवीयता ही व्यक्ति की सबसे बड़ी पूँजी हैं।
सरल, प्रवाहपूर्ण और भावनात्मक भाषा में लिखी गई ‘पराया चाँद’ पाठकों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती है। यह कृति केवल एक साहित्यिक रचना नहीं, बल्कि जीवन, संबंधों और मानवीय भावनाओं की सूक्ष्म व्याख्या भी है। पुस्तक हमें सिखाती है कि बाहरी उपलब्धियों से अधिक महत्वपूर्ण आत्मीय संबंध, सच्चा प्रेम और मानवीय संवेदनाएँ हैं। इन्हीं मूल्यों के माध्यम से जीवन को सार्थक, संतुलित और आनंदमय बनाया जा सकता है।
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ISBN : 9789384657000
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Publication: Divyansh Publications
Description:
‘पराया चाँद’ प्रसिद्ध अवधी साहित्यकार, इतिहासकार और लखनऊ के सांस्कृतिक अध्येता योगेश प्रवीण की एक संवेदनशील साहित्यिक कृति है। इस पुस्तक में मानवीय संबंधों, सामाजिक यथार्थ, प्रेम, विरह, स्मृतियों और जीवन की बदलती परिस्थितियों का मार्मिक चित्रण किया गया है। लेखक अपनी विशिष्ट भावपूर्ण भाषा और सांस्कृतिक दृष्टि के माध्यम से पाठकों को मानवीय संवेदनाओं के निकट ले जाते हैं।
पुस्तक का शीर्षक ‘पराया चाँद’ उस आकांक्षा और दूरी का प्रतीक है, जिसे मनुष्य जीवनभर पाना चाहता है, परंतु वह अक्सर उसकी पहुँच से दूर रह जाती है। लेखक विभिन्न पात्रों और घटनाओं के माध्यम से यह दर्शाते हैं कि जीवन में रिश्तों का महत्व केवल साथ रहने में नहीं, बल्कि विश्वास, अपनत्व और भावनात्मक जुड़ाव में निहित है। जब स्वार्थ, अहंकार और परिस्थितियाँ इन संबंधों पर प्रभाव डालती हैं, तो अपने भी पराए प्रतीत होने लगते हैं।
योगेश प्रवीण ने इस कृति में भारतीय समाज, विशेषकर अवध की तहज़ीब, मानवीय मूल्यों और सामाजिक परिवर्तनों को अत्यंत सहजता से प्रस्तुत किया है। उनकी लेखन शैली में लखनऊ की संस्कृति, भाषा की मिठास और जीवन-दर्शन की गहराई स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। वे यह संदेश देते हैं कि जीवन में प्रेम, करुणा, संवेदनशीलता और मानवीयता ही व्यक्ति की सबसे बड़ी पूँजी हैं।
सरल, प्रवाहपूर्ण और भावनात्मक भाषा में लिखी गई ‘पराया चाँद’ पाठकों को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती है। यह कृति केवल एक साहित्यिक रचना नहीं, बल्कि जीवन, संबंधों और मानवीय भावनाओं की सूक्ष्म व्याख्या भी है। पुस्तक हमें सिखाती है कि बाहरी उपलब्धियों से अधिक महत्वपूर्ण आत्मीय संबंध, सच्चा प्रेम और मानवीय संवेदनाएँ हैं। इन्हीं मूल्यों के माध्यम से जीवन को सार्थक, संतुलित और आनंदमय बनाया जा सकता है।
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