Author: Omprakash Gautam
Rajkumar Siddhart Se Samyak Sambuddh Tak(राजकुमार सिद्धार्थ से सम्यक् संबुद्ध तक)
‘राजकुमार सिद्धार्थ से सम्यक् संबुद्ध तक’ लेखक ओमप्रकाश गौतम की एक प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक कृति है, जिसमें भगवान बुद्ध के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं, उनके आध्यात्मिक विकास तथा ज्ञान प्राप्ति की यात्रा का क्रमबद्ध और सरल वर्णन किया गया है। पुस्तक सिद्धार्थ गौतम के राजकुमार से विश्ववंदनीय बुद्ध बनने तक के संघर्ष, तप, चिंतन और आत्मबोध की कहानी को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है।
पुस्तक में बताया गया है कि कपिलवस्तु के राजकुमार सिद्धार्थ का जीवन प्रारंभ से ही वैभव और सुख-सुविधाओं से परिपूर्ण था। किंतु वृद्धावस्था, रोग, मृत्यु और एक संन्यासी के दर्शन ने उनके मन में जीवन के वास्तविक अर्थ और दुःख के कारणों को जानने की तीव्र जिज्ञासा उत्पन्न की। इस जिज्ञासा ने उन्हें राजमहल, परिवार और सांसारिक सुखों का त्याग कर सत्य की खोज के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
लेखक सिद्धार्थ की कठोर तपस्या, विभिन्न गुरुओं से प्राप्त शिक्षाओं तथा अंततः मध्यम मार्ग को अपनाने की प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन करते हैं। बोधगया में बोधिवृक्ष के नीचे गहन ध्यान के पश्चात सिद्धार्थ को सम्यक् संबोधि प्राप्त हुई और वे गौतम बुद्ध के रूप में प्रसिद्ध हुए। इसके बाद उन्होंने मानवता को चार आर्य सत्य, अष्टांगिक मार्ग, करुणा, अहिंसा, मैत्री और मध्यम मार्ग का संदेश दिया, जिससे मनुष्य दुःखों से मुक्ति प्राप्त कर सकता है।
सरल, प्रेरक और तथ्यपूर्ण शैली में लिखी गई यह पुस्तक बुद्ध के जीवन-दर्शन को सहज रूप में समझाती है। ‘राजकुमार सिद्धार्थ से सम्यक् संबुद्ध तक’ केवल एक जीवनी नहीं, बल्कि आत्मअनुशासन, सत्य की खोज, करुणा और आत्मज्ञान की प्रेरक यात्रा है। यह कृति पाठकों को सिखाती है कि धैर्य, विवेक, आत्मचिंतन और निरंतर प्रयास के माध्यम से मनुष्य अपने जीवन को सार्थक, शांतिपूर्ण और कल्याणकारी बना सकता है।
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ISBN : 9789384657529
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Publication: Divyansh Publications
Description:
‘राजकुमार सिद्धार्थ से सम्यक् संबुद्ध तक’ लेखक ओमप्रकाश गौतम की एक प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक कृति है, जिसमें भगवान बुद्ध के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं, उनके आध्यात्मिक विकास तथा ज्ञान प्राप्ति की यात्रा का क्रमबद्ध और सरल वर्णन किया गया है। पुस्तक सिद्धार्थ गौतम के राजकुमार से विश्ववंदनीय बुद्ध बनने तक के संघर्ष, तप, चिंतन और आत्मबोध की कहानी को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है।
पुस्तक में बताया गया है कि कपिलवस्तु के राजकुमार सिद्धार्थ का जीवन प्रारंभ से ही वैभव और सुख-सुविधाओं से परिपूर्ण था। किंतु वृद्धावस्था, रोग, मृत्यु और एक संन्यासी के दर्शन ने उनके मन में जीवन के वास्तविक अर्थ और दुःख के कारणों को जानने की तीव्र जिज्ञासा उत्पन्न की। इस जिज्ञासा ने उन्हें राजमहल, परिवार और सांसारिक सुखों का त्याग कर सत्य की खोज के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया।
लेखक सिद्धार्थ की कठोर तपस्या, विभिन्न गुरुओं से प्राप्त शिक्षाओं तथा अंततः मध्यम मार्ग को अपनाने की प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन करते हैं। बोधगया में बोधिवृक्ष के नीचे गहन ध्यान के पश्चात सिद्धार्थ को सम्यक् संबोधि प्राप्त हुई और वे गौतम बुद्ध के रूप में प्रसिद्ध हुए। इसके बाद उन्होंने मानवता को चार आर्य सत्य, अष्टांगिक मार्ग, करुणा, अहिंसा, मैत्री और मध्यम मार्ग का संदेश दिया, जिससे मनुष्य दुःखों से मुक्ति प्राप्त कर सकता है।
सरल, प्रेरक और तथ्यपूर्ण शैली में लिखी गई यह पुस्तक बुद्ध के जीवन-दर्शन को सहज रूप में समझाती है। ‘राजकुमार सिद्धार्थ से सम्यक् संबुद्ध तक’ केवल एक जीवनी नहीं, बल्कि आत्मअनुशासन, सत्य की खोज, करुणा और आत्मज्ञान की प्रेरक यात्रा है। यह कृति पाठकों को सिखाती है कि धैर्य, विवेक, आत्मचिंतन और निरंतर प्रयास के माध्यम से मनुष्य अपने जीवन को सार्थक, शांतिपूर्ण और कल्याणकारी बना सकता है।
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