Ramayan Ki Mahila Patra(रामायण की महिला पात्र)

‘रामायण की महिला पात्र’ डॉ. सत्य सिंह द्वारा लिखित एक महत्वपूर्ण शोधपरक कृति है, जिसमें रामायण में वर्णित प्रमुख महिला पात्रों के व्यक्तित्व, चरित्र, कर्तृत्व और सामाजिक महत्व का गहन विश्लेषण किया गया है। पुस्तक का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि रामायण केवल श्रीराम की कथा नहीं, बल्कि उन महिलाओं की भी प्रेरक गाथा है जिन्होंने अपने त्याग, धैर्य, बुद्धिमत्ता और नैतिक मूल्यों से इस महाकाव्य को पूर्णता प्रदान की।

पुस्तक में माता सीता, कौशल्या, कैकेयी, सुमित्रा, उर्मिला, मांडवी, श्रुतकीर्ति, शबरी, तारा, मंदोदरी, त्रिजटा तथा अन्य महिला पात्रों के जीवन और उनके योगदान का विस्तार से वर्णन किया गया है। लेखक बताते हैं कि प्रत्येक पात्र का अपना विशिष्ट महत्व है और उन्होंने विभिन्न परिस्थितियों में साहस, कर्तव्यनिष्ठा, करुणा, त्याग तथा धर्मपालन का आदर्श प्रस्तुत किया। विशेष रूप से सीता के धैर्य, उर्मिला के मौन त्याग, शबरी की अटूट भक्ति, तारा की राजनीतिक सूझबूझ और मंदोदरी की विवेकपूर्ण सलाह को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

डॉ. सत्य सिंह इन पात्रों का अध्ययन केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में भी करते हैं। वे यह दर्शाते हैं कि रामायण की महिलाएँ परिस्थितियों की निष्क्रिय दर्शक नहीं थीं, बल्कि अपने निर्णयों, विचारों और आचरण से कथा की दिशा और घटनाओं को प्रभावित करने वाली सशक्त व्यक्तित्व थीं। पुस्तक यह भी स्पष्ट करती है कि भारतीय संस्कृति में नारी को सदैव शक्ति, धैर्य, करुणा और मर्यादा का प्रतीक माना गया है।

सरल, शोधपरक और प्रभावशाली भाषा में लिखी गई ‘रामायण की महिला पात्र’ पाठकों को रामायण के स्त्री-पक्ष को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्रदान करती है। यह कृति भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, नारी गरिमा और आदर्श जीवन के सिद्धांतों को उजागर करते हुए यह संदेश देती है कि समाज के निर्माण और नैतिक मूल्यों की स्थापना में महिलाओं की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी रही है।

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ISBN : 9789389245448

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Publication: Divyansh Publications
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‘रामायण की महिला पात्र’ डॉ. सत्य सिंह द्वारा लिखित एक महत्वपूर्ण शोधपरक कृति है, जिसमें रामायण में वर्णित प्रमुख महिला पात्रों के व्यक्तित्व, चरित्र, कर्तृत्व और सामाजिक महत्व का गहन विश्लेषण किया गया है। पुस्तक का उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि रामायण केवल श्रीराम की कथा नहीं, बल्कि उन महिलाओं की भी प्रेरक गाथा है जिन्होंने अपने त्याग, धैर्य, बुद्धिमत्ता और नैतिक मूल्यों से इस महाकाव्य को पूर्णता प्रदान की।

पुस्तक में माता सीता, कौशल्या, कैकेयी, सुमित्रा, उर्मिला, मांडवी, श्रुतकीर्ति, शबरी, तारा, मंदोदरी, त्रिजटा तथा अन्य महिला पात्रों के जीवन और उनके योगदान का विस्तार से वर्णन किया गया है। लेखक बताते हैं कि प्रत्येक पात्र का अपना विशिष्ट महत्व है और उन्होंने विभिन्न परिस्थितियों में साहस, कर्तव्यनिष्ठा, करुणा, त्याग तथा धर्मपालन का आदर्श प्रस्तुत किया। विशेष रूप से सीता के धैर्य, उर्मिला के मौन त्याग, शबरी की अटूट भक्ति, तारा की राजनीतिक सूझबूझ और मंदोदरी की विवेकपूर्ण सलाह को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

डॉ. सत्य सिंह इन पात्रों का अध्ययन केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में भी करते हैं। वे यह दर्शाते हैं कि रामायण की महिलाएँ परिस्थितियों की निष्क्रिय दर्शक नहीं थीं, बल्कि अपने निर्णयों, विचारों और आचरण से कथा की दिशा और घटनाओं को प्रभावित करने वाली सशक्त व्यक्तित्व थीं। पुस्तक यह भी स्पष्ट करती है कि भारतीय संस्कृति में नारी को सदैव शक्ति, धैर्य, करुणा और मर्यादा का प्रतीक माना गया है।

सरल, शोधपरक और प्रभावशाली भाषा में लिखी गई ‘रामायण की महिला पात्र’ पाठकों को रामायण के स्त्री-पक्ष को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्रदान करती है। यह कृति भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, नारी गरिमा और आदर्श जीवन के सिद्धांतों को उजागर करते हुए यह संदेश देती है कि समाज के निर्माण और नैतिक मूल्यों की स्थापना में महिलाओं की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी रही है।

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Dr Satya Singh

Dr. Satya Singh is an Indian educationist, researcher, and author known for writing on education, child development, and psychology. Through his books, he presents educational concepts in a simple, practical, and student-friendly manner. His works focus on child psychology, teaching methodologies, and educational development, making them valuable for B.Ed., D.El.Ed., CTET, TET, and other teacher education students. His writing combines theoretical knowledge with practical insights, helping readers understand the psychological and developmental aspects of children effectively.
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